सिस्टोसील रिपेयर

सिस्टोसील रिपेयर आमतौर पर योनि की सामने की दीवार को सही करने के लिए की जाती है। यह उभार एक गेंद पर बैठने जैसा अनुभव, मूत्राशय के अधूरे खाली होने, अतिसक्रिय मूत्राशय के लक्षणों, आवर्तक मूत्र पथ के संक्रमण और श्रोणि की परेशानी जैसे लक्षण पैदा कर सकता है। सर्जरी आमतौर पर एक योनि दृष्टिकोण के माध्यम से की जाती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में रिपेयर के लिए एक संयुक्त पेट और योनि दृष्टिकोण बनाया जाता है। सर्जरी आम तौर पर योनि की त्वचा के साथ मूत्राशय पर एक चीरा बनाकर शुरू होती है। यदि पैल्विक ऊतकों के आराम के लिए अन्य सर्जरी की जा रही हैं, तो अन्य चीरे लगाए जा सकते हैं। मूत्राशय को ढंकने वाले ऊतक का मूल्यांकन कमजोरी या टूटे हुए प्रावरणी ऊतक के क्षेत्रों के लिए किया जाता है। इन दरारों और कमजोरियों को टाकों से रिपेयर की जाती है और कभी-कभी एक ग्राफ्ट या जाल के साथ कवर किया जाता है। यदि योनि में मलाशय का कोई उभार होता है, तो इसे भी उसी समय पर ठीक किया जाएगा- इसे पोस्टरियर रिपेयर या रेक्टोसील रिपेयर कहा जाता है। योनि सिस्टोसील रिपेयर के बाद सबसे आम पोस्टऑपरेटिव लक्षण पैल्विक दबाव और असुविधा है। जैसे जैसे टिश्यू भरते जाएंगे ये एक हफ्ते में ठीक होने लग जाएगा। इस उभर को सही करने की प्रक्रिया की सफलता 85-90% से अधिक उपयोग की गई तकनीक के आधार पर है। सिस्टोसील से होने वाले लक्षण , जैसे कि परेशानिया ख़तम होना , 60-80% समय में सुधार या समाधान होना । चीरा ठीक होने के साथ 4-6 सप्ताह तक योनि से हल्का खून आना आम है।

प्रक्रिया के दौरान होने वाले जोखिम किसी भी जनरल पेल्विक सर्जरी के सामान्य जोखिम हैं, जिनमें शामिल है – अनेस्थेटिक के जोखिम, रक्त के थक्के का जोखिम, साथ ही संक्रमण और रक्तस्राव का जोखिम भी शामिल हैं। किसी भी सर्जरी के साथ हमेशा मौत का खतरा होता है, हालांकि नॉन-कैंसर स्त्री रोग संबंधी सर्जरी के साथ ऐसा बहुत कम होता है। अन्य संभावित जोखिमों में शामिल है -मूत्राशय, मूत्रमार्ग, आंत्र, मूत्रवाहिनी, रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं की चोट। इन सर्जरी के दौरान मूत्राशय, मूत्रमार्ग और मूत्रवाहिनी में चोट लग सकती है, लेकिन भाग्यवश से ये असामान्य है। किसी भी पुरानी सर्जरी वाले मरीजों को मूत्राशय, मूत्रमार्ग और मूत्रवाहिनी में चोट लगने का अधिक खतरा हो सकता है। हम सिस्टोस्कोप के जरिये सर्जरी के दौरान मूत्राशय और मूत्रमार्ग के अंदर यह सुनिश्चित करने के लिए देखते है कि कोई चोट तो नहीं आई है। तंत्रिका की चोट दुर्लभ है, लेकिन लंबे समय तक सर्जरी के परिणामस्वरूप हो सकता है, और आमतौर पर समय के सुधार हो सकता है।

यह संभव है कि लम्बे समय तक रिपेयर की सफलता में मदद करने के लिए सर्जरी के दौरान एक ग्राफ्ट या मेष का उपयोग किया जा सकता है। हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले ग्राफ्ट्स / मेष के संभावित प्रकारों में कैडेवरिक फ़ेशिया (टुटोप्लास्ट), कैडवेरिक डर्मिस (रेप्लिफ़ॉर्म) या पॉलीप्रोपाइलीन (पॉलीफ़ॉर्म) शामिल हैं। मेष के किसी भी प्रकार के ग्राफ्ट के साथ ग्राफ्ट / मेष के अस्वीकृति या जोखिम की संभावना है, जैसे कि योनि चीरा आंशिक रूप से खुलता है। अधिक सामान्य जोखिम का इलाज़ निगरानी के साथ हॉस्पिटल में एक मामूली प्रक्रिया के साथ किया जा सकता है। शायद ही कभी, यह मेष/ ग्राफ्ट मूत्राशय में फैट सकता है जिसकी वजह से विस्तृर्त सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

अन्य जोखिम जो सभी पैल्विक सर्जरी में सामान्य है उनमे पैरों या फेफड़ों में थक्का बनने की संभावना शामिल है, जो जीवन के लिए खतरनाक स्थिति हो सकती है।  निवारण के तौर पर सर्जरी के दौरान कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स का उपयोग, और सर्जरी के अगले ही दिन से चलना फिरना शामिल है। अनेस्थेटिक जोखिम में फेफड़े के एक हिस्से का पतन, निमोनिया और कदाचित मृत्यु शामिल है। जटिलताओं के निवारण में ऑपरेशन के बाद जल्दी चलना, गहरी साँस लेने वाले व्यायाम और खाँसी, और इन्सेंटिव स्पाइरोमीटर का उपयोग शामिल है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, फेफड़े की बीमारी और हृदय रोग जैसी पूर्व-चिकित्सीय स्थिति सर्जरी से जुड़े जोखिम को बढ़ाती है, वैसा ही बढ़ी उम्र में भी होता है। मोटापा एक अतिरिक्त जोखिम कारक है, और मधुमेह होने की वजह से चोट/चीरे को ठीक होने में प्रभावित कर सकता है। धूम्रपान भी इलाज़ को प्रभावित कर सकता है। योनि सिस्टोसेले की रिपेयर की वजह से संभावित दीर्घकालिक जटिलताओं में रिपेयर और इलाज़ की वजह से योनि का संकुचित या छोटा होना शामिल है। इससे संभोग के दौरान कठिनाई या दर्द हो सकता है और संकुचन को ठीक करने के लिए फैलाव या मामूली सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

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